
सर्दियों में साग का स्वाद कैसे बनाएं और भी लाजवाब, ये 5 आसान तरीके अपनाएं, हर कोई उंगलियां चाटता रह जाएगा
सर्दियों का मौसम आते ही घर घर में साग की खुशबू फैलने लगती है. सरसों का साग, पालक का साग या बथुए का साग, हर एक का अपना अलग मजा होता है. ठंड के दिनों में साग न सिर्फ पेट भरता है बल्कि शरीर को गर्माहट और ताकत भी देता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि साग बन तो जाता है, पर उसमें वो बात नहीं आती जो किसी ढाबे या गांव के घरों में बने साग में महसूस होती है. स्वाद थोड़ा फीका लग सकता है या खुशबू उतनी नहीं आती. असल में साग का जादू बड़े बड़े मसालों में नहीं, बल्कि छोटी छोटी बातों में छुपा होता है.अक्सर हम साग बनाते समय एक ही तरह की हरी सब्जी डाल देते हैं, तेज आंच पर जल्दी जल्दी पका लेते हैं और ऊपर से भारी मसाले डालकर सोचते हैं कि स्वाद बढ़ जाएगा. जबकि सच्चाई इसके उलट है. साग जितना सिंपल रखा जाए, उतना ही उसका असली स्वाद बाहर आता है. सही साग वही होता है जो स्मूद हो, हल्की खुशबू वाला हो और खाने के बाद दिल को सुकून दे. अगर आप भी चाहते हैं कि आपका साग हर बार परफेक्ट बने और घर वाले तारीफ करें, तो ये 5 आसान तरीके जरूर अपनाएं.सबसे पहली और सबसे जरूरी बात है साग के लिए सही और ताजी हरी सब्जियों का चुनाव. सिर्फ सरसों या सिर्फ पालक से बना साग कई बार या तो बहुत कड़वा हो जाता है या फिर बिल्कुल हल्का. इसलिए हमेशा हरी सब्जियों का बैलेंस बनाना जरूरी है. सरसों के पत्तों के साथ थोड़ा पालक, थोड़ा बथुआ या फिर मेथी मिलाने से स्वाद में गहराई आती है. ताजी पत्तियां हमेशा ज्यादा मीठी और खुशबूदार होती हैं. सब्जियों को अच्छे से धोकर ही पकाएं और इतना ही पकाएं कि वे नरम हो जाएं. ज्यादा उबालने से स्वाद भी चला जाता है और रंग भी फीका पड़ जाता है.दूसरा तरीका है साग को धीमी आंच पर पकाना. साग कभी भी जल्दबाजी में अच्छा नहीं बनता. जब इसे धीमी आंच पर धीरे धीरे पकाया जाता है, तो हरी सब्जियां अच्छे से गलती हैं और आपस में घुल जाती हैं. इससे साग का टेक्सचर स्मूद बनता है और उसका मिट्टी जैसा देसी स्वाद बाहर आता है. तेज आंच पर पकाने से साग कच्चा सा लग सकता है और उसका स्वाद अधूरा रह जाता है. बीच बीच में चलाते रहें और धैर्य रखें, फर्क आपको खुद महसूस होगा.तीसरा तरीका है सही तड़का. साग का तड़का ही उसकी जान होता है. देसी घी में किया गया तड़का साग को बिल्कुल अलग लेवल पर ले जाता है. घी गरम करें और उसमें लहसुन, प्याज या सूखी लाल मिर्च डालें. ध्यान रखें कि तड़का हल्का सुनहरा हो, जला हुआ नहीं. जला हुआ लहसुन पूरे साग का स्वाद खराब कर सकता है. तैयार साग पर आखिर में यह गरम तड़का डालें. जैसे ही घी साग से मिलता है, उसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है.चौथा तरीका है मसालों को सिंपल रखना. साग कोई मसालेदार सब्जी नहीं है. इसमें ज्यादा मसाले डालने से उसका असली स्वाद दब जाता है. नमक सही समय पर डालना बहुत जरूरी है. बहुत कम या बहुत ज्यादा नमक दोनों ही स्वाद बिगाड़ देते हैं. जीरा, थोड़ा सा धनिया पाउडर और हल्की सी हरी मिर्च काफी होती है. अगर आप बहुत ज्यादा गरम मसाले या तेज मसाले डाल देंगे, तो साग की पहचान ही खो जाएगी. साग में कम मसाले ही सबसे अच्छा काम करते हैं.चौथा तरीका है मसालों को सिंपल रखना. साग कोई मसालेदार सब्जी नहीं है. इसमें ज्यादा मसाले डालने से उसका असली स्वाद दब जाता है. नमक सही समय पर डालना बहुत जरूरी है. बहुत कम या बहुत ज्यादा नमक दोनों ही स्वाद बिगाड़ देते हैं. जीरा, थोड़ा सा धनिया पाउडर और हल्की सी हरी मिर्च काफी होती है. अगर आप बहुत ज्यादा गरम मसाले या तेज मसाले डाल देंगे, तो साग की पहचान ही खो जाएगी. साग में कम मसाले ही सबसे अच्छा काम करते हैं.पांचवां और आखिरी तरीका है फिनिशिंग टच. यही वो स्टेप है जो अच्छे साग को शानदार साग बना देता है. आखिर में थोड़ा सा मक्खन डालने से साग और भी स्मूद और चमकदार हो जाता है. अगर आप चाहें तो ऊपर से थोड़ा नींबू का रस भी डाल सकते हैं, इससे स्वाद में हल्की सी ताजगी आ जाती है. कुछ लोग ऊपर से फ्रेश क्रीम भी डालते हैं, जो साग को रिच टच देती है. गरमा गरम साग को मक्के की रोटी या सादी रोटी के साथ परोसें, मजा दोगुना हो जाएगा.अगर आप इस साग की गैलरी बनाना चाहते हैं, तो एक तस्वीर में उबलते हुए हरे पत्तों को दिखाया जा सकता है, जहां साग का असली रंग नजर आए. दूसरी तस्वीर में देसी घी में तड़का लगाते हुए लहसुन और मिर्च की खुशबू को कैप्चर किया जा सकता है. तीसरी तस्वीर में तैयार साग को मक्के की रोटी और मक्खन के साथ परोसा हुआ दिखाया जा सकता है, जो देखने में ही मुंह में पानी ला दे.

