
‘राहत देने की बजाय मोदी सरकार…’, UPI पर टैक्स को लेकर खरगे का केंद्र पर बड़ा हमला
नई दिल्ली। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। खरगे ने UPI लेनदेन पर किसी भी तरह के टैक्स या शुल्क की चर्चा को लेकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों को राहत दी जाए और छोटे दुकानदारों, व्यापारियों तथा आम उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
खरगे ने कहा कि देश में UPI ने डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों तक लोग UPI के जरिए भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट व्यवस्था ने लेनदेन को आसान और तेज बनाने के साथ-साथ कैश पर निर्भरता भी कम की है। ऐसे में UPI से जुड़े किसी भी नए टैक्स या अतिरिक्त शुल्क का असर सीधे आम जनता और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को महंगाई और बढ़ते खर्च के बीच जनता को राहत देने की दिशा में काम करना चाहिए। उनका आरोप है कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ UPI जैसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले डिजिटल भुगतान माध्यम पर टैक्स की चर्चा चिंता पैदा करती है।
खरगे ने विशेष रूप से छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि UPI आज छोटे व्यापारियों के लिए भुगतान प्राप्त करने का सबसे आसान माध्यम बन चुका है। अगर डिजिटल लेनदेन पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आता है, तो इसका असर छोटे व्यापारियों की कमाई और उनके कारोबार की लागत पर पड़ सकता है। कांग्रेस का कहना है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों को फायदा मिले।
उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि UPI लेनदेन को लेकर सरकार की भविष्य की नीति क्या है। कांग्रेस के मुताबिक, डिजिटल भुगतान से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को लागू करने से पहले उसके आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया जाना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि UPI अब सिर्फ एक भुगतान प्रणाली नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बन चुका है।
खरगे के बयान के बाद UPI और डिजिटल पेमेंट पर संभावित शुल्क या टैक्स को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर सवाल उठाती रही है और अब UPI के मुद्दे को भी आम जनता से जुड़े आर्थिक विषय के तौर पर उठा रही है। पार्टी का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका खर्च आम नागरिकों पर न डाला जाए।
वहीं, UPI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इससे जुड़ी नीतियों को लेकर सरकार का कोई भी फैसला सीधे करोड़ों डिजिटल लेनदेन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल खरगे के बयान ने UPI टैक्स के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष का यह हमला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है। UPI के जरिए छोटे-बड़े भुगतान करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। यही वजह है कि UPI पर किसी भी संभावित टैक्स या शुल्क को लेकर आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों के बीच भी चर्चा होती रही है। अब खरगे के बयान के बाद विपक्ष और सरकार के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

