गोवा में AAP-GFP गठबंधन, 2027 में दो सीटों से आगे बढ़ पाएगी केजरीवाल की पार्टी?

गोवा में AAP-GFP गठबंधन, 2027 में दो सीटों से आगे बढ़ पाएगी केजरीवाल की पार्टी?

पणजी। गोवा विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) ने हाथ मिला लिया है। दोनों दलों ने ‘गोवा फर्स्ट’ नाम से गठबंधन का ऐलान किया है। गठबंधन का दावा है कि वह बीजेपी और कांग्रेस के अलावा गोवा की जनता के सामने एक मजबूत राजनीतिक विकल्प पेश करेगा।

इस गठबंधन की घोषणा ऐसे समय हुई है जब गोवा की राजनीति में 2027 का चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। 40 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 21 सीटों की जरूरत होती है। 2022 के चुनाव में बीजेपी ने 20 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में वापसी की थी, जबकि कांग्रेस को 11 और आम आदमी पार्टी को 2 सीटें मिली थीं। GFP ने भी एक सीट पर जीत दर्ज की थी।

AAP के लिए 2027 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछली बार पार्टी गोवा में सिर्फ दो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी। अब GFP के साथ गठबंधन करके पार्टी अपने राजनीतिक आधार को बढ़ाने की कोशिश में जुटी है। वहीं GFP प्रमुख विजय सरदेसाई गोवा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और उनके पास क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक पकड़ है।

गठबंधन के ऐलान के दौरान अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि गोवा की जनता को दोनों दलों के बीच राजनीतिक विकल्प नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति तक पहुंचने के लक्ष्य के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा।

हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AAP 2022 की दो सीटों के आंकड़े से आगे निकल पाएगी? इसके लिए पार्टी को सिर्फ गठबंधन का सहारा नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने और मतदाताओं के बीच अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने की चुनौती का सामना करना होगा।

दूसरी ओर, बीजेपी पहले ही 2027 के चुनाव में 40 में से 30 सीटें जीतने का लक्ष्य जाहिर कर चुकी है। ऐसे में AAP-GFP गठबंधन के सामने मुकाबला आसान नहीं होगा।

गोवा की राजनीति में दल-बदल और चुनाव बाद गठबंधन का इतिहास भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। 2022 के बाद कांग्रेस के आठ विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे, जिससे विधानसभा में बीजेपी की स्थिति और मजबूत हुई। ऐसे राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच AAP और GFP का गठबंधन मतदाताओं को कितना प्रभावित कर पाएगा, इसका फैसला 2027 के विधानसभा चुनाव में होगा।

फिलहाल ‘गोवा फर्स्ट’ के जरिए केजरीवाल की पार्टी ने गोवा में अपनी चुनौती को विस्तार देने का संकेत दे दिया है। अब नजर इस बात पर होगी कि गठबंधन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ता है, उम्मीदवारों का चयन किस तरह होता है और क्या वह AAP के 2022 के दो सीटों वाले प्रदर्शन को पीछे छोड़कर गोवा की सत्ता की दौड़ में प्रभावी खिलाड़ी बन पाता है।

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