
मुंबई में 3400 एकड़ जमीन का मालिक है ये परिवार, अंबानी भी नहीं हैं आसपास! जानें कैसे बनी इतनी बड़ी संपत्ति
मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। यहां जमीन की कीमतें देश के सबसे महंगे बाजारों में शामिल हैं। शहर में जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी करोड़ों रुपये का हो सकता है। ऐसे में अगर किसी एक कारोबारी परिवार के पास मुंबई में हजारों एकड़ जमीन हो, तो यह बात अपने आप में बेहद चौंकाने वाली है।
जब मुंबई के बड़े कारोबारी परिवारों की बात होती है तो अक्सर अंबानी, टाटा और दूसरे बड़े उद्योगपतियों का नाम सामने आता है। लेकिन जमीन के बड़े भंडार के मामले में गोदरेज परिवार का नाम बेहद खास है। उपलब्ध दावों के मुताबिक, गोदरेज समूह से जुड़ी जमीन मुंबई में करीब 3,400 एकड़ तक फैली हुई है।
हालांकि, जमीन के स्वामित्व से जुड़े आंकड़ों में अलग-अलग स्रोतों के अनुसार अंतर हो सकता है और पूरी जमीन को एक ही व्यक्ति की निजी संपत्ति मानना सही नहीं होगा। इसमें कंपनी, ट्रस्ट और अन्य संस्थागत स्वामित्व से जुड़ी जमीन भी शामिल हो सकती है।
मुंबई में इतनी बड़ी जमीन कैसे आई?
गोदरेज परिवार की मुंबई में जमीन की कहानी काफी पुरानी है। इसकी शुरुआत 20वीं सदी के मध्य में हुई, जब मुंबई आज की तरह रियल एस्टेट का सबसे महंगा शहर नहीं बना था।
गोदरेज समूह के संस्थापक परिवार ने उस दौर में मुंबई के अपेक्षाकृत कम विकसित इलाकों में जमीन खरीदी। बाद में यही इलाके शहर के तेजी से विस्तार का हिस्सा बन गए।
सबसे ज्यादा चर्चा विखरोली में मौजूद गोदरेज की जमीन को लेकर होती है। आज यह इलाका मुंबई के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल है, लेकिन जब यहां जमीन खरीदी गई थी तब परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं।
3,000 एकड़ की जमीन की कहानी
दिए गए विवरण के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद गोदरेज परिवार ने तत्कालीन बॉम्बे में करीब 3,000 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसके लिए लगभग 30 लाख रुपये की रकम चुकाए जाने का दावा किया जाता है।
इसके बाद परिवार ने करीब 400 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी खरीदी। इस तरह कुल जमीन लगभग 3,400 एकड़ तक पहुंचने की बात कही जाती है।
उस समय मुंबई के बाहरी और कम विकसित इलाकों में इतनी बड़ी जमीन खरीदना आज की तुलना में बिल्कुल अलग आर्थिक फैसला था। जमीन की कीमतें आज जितनी ऊंची हैं, तब वैसी स्थिति नहीं थी।
पिरोजशा गोदरेज की दूरदर्शिता
इस पूरी कहानी में पिरोजशा बुर्जोरजी गोदरेज का नाम महत्वपूर्ण है। वह गोदरेज समूह के शुरुआती दौर के प्रमुख लोगों में शामिल थे और उन्होंने कंपनी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई।
गोदरेज परिवार ने केवल कारोबार पर ध्यान नहीं दिया बल्कि जमीन और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में भी लंबे समय के लिए निवेश किया। यही वजह है कि समय के साथ उनकी जमीन का मूल्य बहुत तेजी से बढ़ा।
जो जमीन कभी शहर के अपेक्षाकृत दूर वाले इलाके में मानी जाती थी, वही बाद में मुंबई के तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्र का हिस्सा बन गई।
आज इतनी जमीन की कीमत कितनी होगी?
3,400 एकड़ यानी करीब 13.75 वर्ग किलोमीटर जमीन होती है। मुंबई जैसे शहर में इतनी बड़ी जमीन का बाजार मूल्य निकालना आसान नहीं है।
इसका कारण यह है कि पूरी जमीन एक ही तरह की नहीं हो सकती। कुछ जमीन विकास योग्य हो सकती है, कुछ पर पर्यावरण या सरकारी नियम लागू हो सकते हैं और कुछ जमीन कंपनी या ट्रस्ट की अलग-अलग योजनाओं से जुड़ी हो सकती है।
इसके अलावा मुंबई में जमीन का मूल्य इलाके, विकास अधिकार, FSI, जमीन के इस्तेमाल और कानूनी स्थिति के अनुसार बहुत अलग-अलग होता है।
इसलिए केवल 3,400 एकड़ को किसी एक मौजूदा बाजार दर से गुणा करके उसकी कुल कीमत बताना भ्रामक हो सकता है।
गोदरेज की जमीन पर क्या होता है?
गोदरेज समूह की मुंबई में मौजूद जमीन का एक बड़ा हिस्सा विखरोली और उसके आसपास के क्षेत्र से जुड़ा है। यहां लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियां, हरित क्षेत्र और दूसरे विकास कार्य देखने को मिलते रहे हैं।
गोदरेज समूह ने समय-समय पर अपनी जमीन के कुछ हिस्सों के विकास की योजनाएं भी पेश की हैं। इनमें आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं।
यानी इतनी बड़ी जमीन का मतलब यह नहीं है कि पूरा 3,400 एकड़ क्षेत्र खाली पड़ा है या उसे एक साथ बेचा जा सकता है।
अंबानी से तुलना क्यों होती है?
मुंबई की जमीन और संपत्ति की चर्चा होते ही देश के सबसे बड़े कारोबारी परिवारों में शामिल अंबानी परिवार का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। मुंबई में मुकेश अंबानी का एंटीलिया दुनिया के सबसे चर्चित निजी आवासों में से एक है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—व्यक्तिगत संपत्ति और कंपनी या संस्थागत जमीन का सीधा मुकाबला नहीं किया जा सकता।
गोदरेज समूह की हजारों एकड़ जमीन से जुड़ी चर्चा मुख्य रूप से कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं की भूमि पर आधारित है। इसलिए इसे मुकेश अंबानी की निजी संपत्ति से सीधे तुलना करना उचित नहीं होगा।
30 लाख रुपये से हजारों करोड़ की जमीन?
इस कहानी को सबसे ज्यादा आकर्षक बनाने वाली बात यही है कि जिस जमीन को कथित तौर पर लगभग 30 लाख रुपये में खरीदा गया था, उसकी कीमत आज के मुंबई में कल्पना से भी कहीं ज्यादा हो सकती है।
लेकिन यहां महंगाई और समय के अंतर को समझना जरूरी है। 1940 के दशक के 30 लाख रुपये और आज के 30 लाख रुपये की क्रय शक्ति बिल्कुल अलग थी।
साथ ही, आज की जमीन की संभावित कीमत केवल ऐतिहासिक खरीद मूल्य से तय नहीं की जा सकती। जमीन की वर्तमान उपयोगिता, विकास की अनुमति और बाजार की स्थिति जैसे कई कारक इसकी कीमत निर्धारित करते हैं।
क्यों खास है गोदरेज की जमीन?
मुंबई में इतनी बड़ी जमीन का एक ही कारोबारी समूह से जुड़ा होना अपने आप में असाधारण है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि मुंबई पिछले कई दशकों में तेजी से फैला और जमीन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई।
गोदरेज परिवार ने जिस समय बड़े भूखंडों में निवेश किया, उस समय शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि आने वाले दशकों में यही जमीन मुंबई के सबसे मूल्यवान शहरी इलाकों में शामिल हो जाएगी।
जमीन ने बदल दी कारोबारी विरासत
गोदरेज परिवार की कहानी सिर्फ साबुन, घरेलू उत्पाद, फर्नीचर या दूसरे कारोबार तक सीमित नहीं है। मुंबई में लंबे समय से मौजूद जमीन ने भी समूह की संपत्ति और कारोबारी विरासत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
3,400 एकड़ का आंकड़ा इसलिए चौंकाता है क्योंकि मुंबई जैसे बेहद घने और महंगे महानगर में इतनी बड़ी भूमि किसी एक कारोबारी समूह से जुड़ी होना दुर्लभ है। हालांकि, इस आंकड़े को कंपनी/संस्थागत स्वामित्व और विकास प्रतिबंधों के संदर्भ में समझना जरूरी है, न कि इसे एक व्यक्ति की पूरी निजी जमीन मान लेना चाहिए।

