चार्ली चैपलिन से प्रेरणा, अधूरी मोहब्बत की आग; ‘आवारा’ से राज कपूर ने रचा सिनेमा इतिहास

चार्ली चैपलिन से प्रेरणा, अधूरी मोहब्बत की आग; ‘आवारा’ से राज कपूर ने रचा सिनेमा इतिहास

हिंदी सिनेमा में कपूर खानदान का लंबा इतिहास रहा है। मूक सिनेमा के दौर से लेकर ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन सिनेमा तक जिन चंद कलाकारों ने अपनी पहचान बनाई उनमें हिंदी सिनेमा के शोमैन का नाम सबसे पहला आता है। आज उनकी 101वीं जयंती हैं। भारतीय सिनेमा को एक अलग भाषा, एक अलग सोच और आम आदमी का चेहरा देने वाले शोमैन राज कपूर की आज 101वीं जयंती है। मासूम मुस्कान, नीली आंखें और शरीर की हरकतों में छुपा दर्द- राज कपूर सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक विचार थे। उन्होंने सिनेमा को मनोरंजन से आगे बढ़ाकर समाज का आईना बनाया, जिसमें गरीबी, बेरोजगारी, वर्गभेद और इंसानी अकेलापन साफ दिखाई देता था। आइए इस मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़े किस्सों के बारे में। राज कपूर को यूं ही ‘भारत का चार्ली चैपलिन’ नहीं कहा गया। बचपन से ही वो चार्ली चैपलिन की फिल्मों से गहराई से जुड़े हुए थे। जहां बाकी लोग उनकी फिल्मों पर हंसते थे, वहीं राज कपूर की आंखें नम हो जाया करती थीं। चैपलिन का वह किरदार—जिसका न कोई घर होता है, न कोई ठिकाना- राज कपूर को भीतर तक छू जाता था। यही वजह रही कि आगे चलकर ‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘मेरा नाम जोकर’ जैसे किरदारों में उन्होंने उसी ट्रैजिक-कॉमिक आत्मा को भारतीय संदर्भों में ढाल दिया।

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