सज्जन कुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी, 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में कोर्ट का फैसला

सज्जन कुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी, 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में कोर्ट का फैसला

1984 के सिख विरोधी दंगे से जुड़े मामले में सज्जन कुमार को बड़ी राहत मिली है. दिल्ली कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान राजधानी के जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा से जुड़े मामले में सज्जन कुमार को बरी कर दिया. सज्जन कुमार कांग्रेस के पूर्व सांसद रह चुके हैं. स्पेशल जज डिग विनय सिंह ने मौखिक रूप से एक संक्षिप्त आदेश सुनाते हुए सज्जन कुमार को बरी कर दिया. फिलहाल, विस्तृत आदेश का इंतजार है.

पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को जब कोर्ट ने बताया कि उन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में बरी कर दिया गया है तो सज्जन कुमार ने दोनों हाथ जोड़कर कोर्ट का शुक्रिया अदा किया. अगस्त 2023 में एक कोर्ट ने सज्जन कुमार पर दंगा करने और दुश्मनी फैलाने का आरोप लगाया था, जबकि उन्हें हत्या और आपराधिक साजिश के अपराधों से बरी कर दिया था. विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने पिछले साल दिसंबर में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 22 जनवरी के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
फरवरी 2015 में एक विशेष जांच दल ने दंगों के दौरान दिल्ली के जनकपुरी और विकासपुरी में हुई हिंसा से जुड़ी शिकायतों के आधार पर कुमार के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की थीं. पहली प्राथमिकी जनकपुरी में हुई हिंसा से संबंधित थी, जहां एक नवंबर 1984 को सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या कर दी गई थी. दूसरी प्राथमिकी गुरबचन सिंह के मामले में दर्ज की गई थी, जिनको दो नवंबर 1984 को विकासपुरी में कथित तौर पर जिंदा जला दिया गया था.

सज्जन कुमार फिलहाल जेल में हैं. उन्हें पिछले साल 25 फरवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने सरस्वती विहार इलाके में 1 नवंबर, 1984 को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने कहा था कि हालांकि इस मामले में दो निर्दोष व्यक्तियों की हत्या कोई छोटा अपराध नहीं था, लेकिन यह दुर्लभ से दुर्लभतम मामला नहीं था जिसके लिए मौत की सजा दी जाए.
ट्रायल कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह मामला उसी घटना का हिस्सा था और इसे उसी घटना की निरंतरता के रूप में देखा जा सकता है जिसके लिए सज्नज कुमार को 17 दिसंबर, 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पालम कॉलोनी इलाके में इसी तरह के दंगे की घटना के दौरान पांच लोगों की मौत का दोषी पाया था.
नानावती आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, दंगों के संबंध में दिल्ली में 587 FIR दर्ज की गई थीं, जिनमें 2,733 लोगों की हत्या हुई थी. कुल FIR में से लगभग 240 FIR को पुलिस ने ‘पता नहीं चला’ कहकर बंद कर दिया और 250 मामलों में बरी कर दिया गया. नानावती आयोग को हिंसा और उसके बाद के हालात की जांच के लिए गठित किया गया था.
587 एफआईआर में से केवल 28 में सजा हुई, जिसमें लगभग 400 लोगों को दोषी ठहराया गया. पूर्व सांसद सहित लगभग 50 लोगों को हत्या का दोषी ठहराया गया. सज्जन कुमार उस समय एक प्रभावशाली कांग्रेस नेता और सांसद थे, पर 1 और 2 नवंबर 1984 को दिल्ली की पालम कॉलोनी में पांच लोगों की हत्या से जुड़े एक मामले में आरोप लगाया गया था. इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी, और सज़ा को चुनौती देने वाली उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है.
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