
भारत पर लगाए गए 50% पारस्परिक टैरिफ खत्म होने के संकेत, क्या दबाव में आकर अमेरिका करेगा समझौता?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के तीन सदस्यों ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को एक अहम प्रस्ताव पेश किया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस राष्ट्रीय आपातकालीन घोषणा को समाप्त करना है, जिसके आधार पर भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया था। सांसदों ने इन टैरिफ उपायों को “गैरकानूनी” करार देते हुए कहा कि इससे न केवल अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि अमेरिकी श्रमिकों, उपभोक्ताओं और उद्योगों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सदस्य डेबोरा रॉस, मार्क वीजी और भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति के नेतृत्व में पेश किया गया है। सांसदों का कहना है कि राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों का इस तरह इस्तेमाल करना संविधान की भावना के खिलाफ है और इससे व्यापारिक स्थिरता कमजोर होती है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। प्रतिनिधि सभा में पेश किया गया यह प्रस्ताव सीनेट में पहले से मौजूद एक द्विदलीय प्रस्ताव के बाद सामने आया है। सीनेट में पेश उस प्रस्ताव का उद्देश्य ब्राजील पर लगाए गए इसी तरह के टैरिफ को समाप्त करना और भविष्य में राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों के इस्तेमाल को सीमित करना है। प्रतिनिधि सभा के सांसदों का मानना है कि यदि इस तरह की शक्तियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इससे अमेरिका की व्यापार नीति में अनिश्चितता बनी रहेगी और वैश्विक साझेदारों के साथ संबंध और कमजोर होंगे।

