“बारिश की उस रात की मुलाकात: शिव और मीरा की कहानी”

“बारिश की उस रात की मुलाकात: शिव और मीरा की कहानी”

वो बारिश की रात

शिव और मीरा की मुलाकात एक बारिश की रात में हुई थी। वह दिन था अक्टूबर का, और अचानक मौसम बदल गया। मीरा अपने घर वापस जा रही थी जब तेज बारिश शुरू हो गई। वह भीगते-भीगते एक पुरानी किताबों की दुकान में छिप गई। वहीं शिव भी उसी दुकान में आया था।

शिव को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। बारिश के पानी की बूँदों और पुराने पेपर की खुशबू में दोनों की नजरें पहली बार मिलीं। दोनों ने हल्की-हल्की मुस्कुराहट के साथ एक-दूसरे से बात शुरू की।

“बारिश में छतरी लाना भूल गए?” शिव ने हंसते हुए पूछा।
“हाँ, लगता है कि मौसम ने मुझे सबक सिखाने का सोचा,” मीरा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

उनकी बातें घंटों तक चलीं। किताबों, संगीत, फिल्मों और जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियों पर। बारिश के पानी ने जैसे समय को थमाकर रख दिया।

वो रात खत्म हुई, लेकिन दोनों के दिलों में एक अजीब सी खट्टी-मीठी याद रह गई। अगले हफ़्ते, मीरा ने किताब की दुकान जाने का फैसला किया। और वहां शिव ने उसका इंतजार कर रखा था।

धीरे-धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। लेकिन प्यार की राह हमेशा आसान नहीं होती। मीरा के परिवार को पहले शिव पसंद नहीं आया। उनकी नौकरी और जिंदगी के अनिश्चितताओं को लेकर परिवार ने विरोध किया।

शिव ने हार नहीं मानी। उसने मीरा के परिवार को समझाया, उनके भरोसे और ईमानदारी को दिखाया। कई महीनों की कोशिशों के बाद, मीरा के परिवार ने उन्हें स्वीकार कर लिया।

अंत में, एक साल बाद, उसी पुरानी किताबों की दुकान में दोनों ने शादी की। और बारिश की वो पहली रात हमेशा उनके लिए यादगार बनी रही।

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