
“बचपन की दोस्ती से पनपा सच्चा प्यार: आरव और तारा की कहानी”
एक अधूरी चाहत की कहानी
यह कहानी है आरव और तारा की। दोनों बचपन के दोस्त थे, जो एक ही मोहल्ले में रहते थे। आरव हमेशा से ही समझदार और चुप रहने वाला लड़का था, जबकि तारा नटखट और खुली सोच वाली लड़की। बचपन में उनकी दोस्ती कितनी गहरी थी, यह दोनों के परिवार भी जानते थे।
समय बीतता गया। आरव कॉलेज जाने के बाद शहर में एक नई लाइफ शुरू करता है, जबकि तारा अपनी पढ़ाई अपने शहर में ही पूरी करती रही। लेकिन आरव की यादें हमेशा तारा के दिल में रहतीं। कॉलेज के दिनों में आरव ने कई बार अपने दिल की बात कहने की कोशिश की, लेकिन कभी हिम्मत नहीं जुटा सका।
तारा भी आरव को बहुत चाहती थी, लेकिन उसने सोचा कि आरव की जिंदगी में उसका कोई खास महत्व नहीं होगा। वह भी अपने मन की भावनाओं को हमेशा छुपा के रखती रही।
सालों बाद, एक दिन आरव और तारा की मुलाकात हुई। दोनों एक कॉफी शॉप में बिना सोचे मिले। पहली नजर में ही उनके दिलों में पुरानी यादें ताजा हो गईं। आरव ने तारा को देखा और अचानक सब कुछ स्पष्ट हो गया—वो प्यार जो उसने सालों तक छुपा रखा था, अब अबाध रूप से सामने था।
तारा की आंखों में भी वही चमक थी। दोनों घंटों बात करते रहे, अपने बचपन, कॉलेज और उन सब यादों के बारे में जो उन्होंने साथ बिताईं। लेकिन इस बार कुछ अलग था—अब वह सिर्फ दोस्ती नहीं थी, यह प्यार था।
आरव ने धीरे से तारा का हाथ पकड़ते हुए कहा, “तारा, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। और अब मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता।”
तारा मुस्कुराई और बोली, “आरव, मैं भी तुमसे हमेशा प्यार करती रही हूँ। बस डर थी कि शायद तुम महसूस न करो।”
उस दिन के बाद, आरव और तारा ने फैसला किया कि वे अब कभी अलग नहीं होंगे। उन्होंने अपने प्यार को पूरे विश्वास और ईमानदारी के साथ अपनाया। और यही कहानी है—एक अधूरी चाहत की, जो समय और दूरी के बावजूद अपनी मंज़िल पा गई।

