पीलीभीत: यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ आक्रोश: बिलसंडा में फूंका पुतला, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

पीलीभीत: यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ आक्रोश: बिलसंडा में फूंका पुतला, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ आक्रोश: बिलसंडा में फूंका पुतला, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
बिलसंडा (पीलीभीत): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जातिगत भेदभाव को लेकर जारी किए गए नए नियमों के विरोध में आज बिलसंडा नगर पंचायत के नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और यूजीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया और महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता आशीष सक्सेना और नितिन त्रिवेदी ने कहा कि यूजीसी द्वारा पारित हालिया नियम “काले कानून” के समान हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन नियमों के माध्यम से सवर्ण (सामान्य वर्ग) के छात्रों को बिना किसी ठोस जांच के सीधे तौर पर दोषी मान लिया गया है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
प्रमुख मांगें और आपत्तियां
ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई गई है:
पूर्वाग्रह का आरोप: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि नए नियमों में सवर्ण छात्रों को पहले से ही अपराधी की दृष्टि से देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी के साथ भेदभाव होता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, न कि आपसी रंजिश निकालने के लिए कानून का दुरुपयोग करने का मौका दिया जाए।
कानूनों की अधिकता: ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि रैगिंग और भेदभाव रोकने के लिए पहले से ही ‘एंटी-रैगिंग नियम’ और ‘एससी-एसटी एक्ट’ प्रभावी हैं। ऐसे में इस नए नियम की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए हैं।
सामाजिक वैमनस्य का डर: प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि इस तरह के नियमों से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शैक्षिक माहौल में जहर घुलेगा और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच नफरत की खाई और गहरी होगी।
भारी संख्या में मौजूद रहे लोग
पुतला दहन के दौरान भारी जनसमूह उमड़ा। इस मौके पर मुख्य रूप से आशीष सक्सेना नितिन त्रिवेदी रामलखन, अनुपम दीक्षित, वैभव सक्सेना, अमित मिश्रा, रामदास पाठक, मोनी अवस्थी सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। ज्ञापन पर रजत कश्यप, आशुतोष सिन्हा, सुशील शर्मा, अमित जायसवाल, हिमांशु सक्सेना और अनुज मिश्रा जैसे कई लोगों के हस्ताक्षर भी मौजूद थे।
आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक शुरुआत है। यदि सरकार और यूजीसी ने इस “काले कानून” को तुरंत वापस नहीं लिया, तो बिलसंडा के नगरवासी और छात्र मिलकर एक वृहद आंदोलन छेड़ेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर वे आमरण अनशन और चक्का जाम करने के लिए भी विवश होंगे।
नगर में इस प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम रहे। फिलहाल, ज्ञापन को उचित माध्यम से राष्ट्रपति भवन तक पहुँचाने का आश्वासन दिया गया है।

पीलीभीत से संवाददाता अनिल कुमार वर्मा

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