‘तुम्हें अब कोई नहीं बचा सकता…’ जज से मांगी 3 करोड़ की फिरौती, 12 दिन बाद FIR

बालोद में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत देवांगन को धमकी भरा पत्र मिला है. इसमें 3 करोड़ की फिरौती मांगी गई है और परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई. मजिस्ट्रेट ने FIR दर्ज कराई है और सुरक्षा की मांग की है.

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां बालोद जिले के गुंडरदेही के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रशांत कुमार देवांगन को एक धमकी भरा पत्र मिला है, जिसमें 3 करोड़ की फिरौती मांग और परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई है. मामले में मजिस्ट्रेट ने 8 अप्रैल को FIR दर्ज कराई है. शिकायत दर्ज होने के बाद जिले में हड़कंप मच गया. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

मामले तक सामने आया, जब पुलिस ने पोर्टल पर FIR की काॅपी अपलोड की. जानकारी के अनुसार 27 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 3 बजकर 25 मिनट पर कोर्ट कार्य के दौरान एक पोस्टमैन द्वारा मजिस्ट्रेट के कार्यालय में एक बंद लिफाफा दिया गया, जब मजिस्ट्रेट ने स्वयं लिफाफा खोलकर पत्र पढ़ा, तो उसमें लिखी बातों ने सभी को चौंका दिया. घटना के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार देवांगन खुद थाने जाकर मामले की शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कराया है और तत्काल जांच व सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है.

मांगी 3 करोड़ की फिरौत

पत्र में आरोपी ने स्वयं को नक्सली संगठन से जुड़ा हुआ बताया. उसने मजिस्ट्रेट से 2- 3 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी है. पत्र के जरिए मांग पूरी नहीं करने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई है. पत्र में मजिस्ट्रेट पर रिश्वत लेने, गलत फैसले देने और गरीबों के साथ अन्याय करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं.

पत्र के अंत में ‘तुम्हारा मौत नक्सली संगठन, कांकेर-बस्तर (छत्तीसगढ़)’ लिखकर स्पष्ट धमकी दी गई है कि ‘तुम्हें कोई नहीं बचा सकता’ यह पत्र पूरी तरह से नीली स्याही से हाथ से लिखा गया है. वहीं, लिफाफे पर ‘एल.के.एल. बस्तर कांकेर छत्तीसगढ़’ और न्यायालय का पता अंकित पाया गया, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है.

जांच और सुरक्षा की मांग

मजिस्ट्रेट ने दर्ज शिकायत में तुरंत कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है. उन्होंने पत्र भेजने वाले की पहचान कर उसके नेटवर्क का खुलासा करने की भी मांग की है. इस घटना के सामने आने के बाद न्यायिक एवं प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है.

न्यायपालिका जैसे संवेदनशील संस्थान को इस प्रकार की धमकी मिलना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कानून व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती है.

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