
क्या थम जाएगी कांग्रेस में कलह? राहुल गांधी के ऑफिस में थरूर की ‘पॉवर मीटिंग’, आधे घंटे तक बंद कमरे में मंथन
कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह की चर्चाएं तेज हो गई हैं. वजह बनी है शशि थरूर की वह बंद कमरे वाली मुलाकात. जो उन्होंने राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ संसद परिसर में की. यह मीटिंग राहुल गांधी के ऑफिस में हुई. दरवाजा बंद रहा और बाहर मीडिया इंतजार करता रहा. आधे घंटे से ज्यादा समय तक भीतर क्या बात हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई. लेकिन इस खामोशी ने सवाल और अटकलें जरूर बढ़ा दीं. कांग्रेस इस वक्त संगठनात्मक चुनौतियों, चुनावी दबाव और नेतृत्व संतुलन के नाजुक दौर से गुजर रही है. ऐसे में थरूर जैसे सीनियर नेता की ‘पॉवर मीटिंग’ को हल्के में नहीं लिया जा सकता.
बता दें कि हाल के महीनों में शशि थरूर लगातार सुर्खियों में रहे हैं. कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर. कभी पार्टी बैठकों से दूरी को लेकर. कभी केरल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर. कांग्रेस नेतृत्व के साथ यह सीधी बातचीत ऐसे समय हुई है, जब बजट सत्र शुरू होने वाला है और केरल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते दिख रहे हैं. पार्टी को एकजुट दिखना है और थरूर जैसे चेहरे को नजरअंदाज करना भी मुश्किल है. इसलिए यह मीटिंग सिर्फ एक औपचारिक भेंट नहीं बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही बेचैनी का संकेत भी मानी जा रही है.
गुरुवार को शशि थरूर संसद पहुंचे. उन्होंने पहले कहा, ‘मैं संसद जा रहा हूं.’ समय को लेकर पूछने पर बोले, ‘जब होगा, तब होगा.’ फिर जब सवाल और तीखे हुए तो उन्होंने पलटकर कहा, ‘अपने पार्टी लीडर से मिलना क्या कोई अनोखी बात है?’ इसके कुछ ही देर बाद न्यूज एजेंसी ANI ने पुष्टि की कि थरूर, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक कर रहे हैं. यह बैठक आधे घंटे से ज्यादा चली. तीनों नेताओं के बीच बातचीत बंद कमरे में हुई. कोई प्रेस ब्रीफिंग नहीं हुई. यही चुप्पी अब चर्चा का केंद्र बन गई है.
दरअसल, बीते कुछ समय में शशि थरूर ने कई अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया. केरल चुनाव की रणनीति पर होने वाली बैठक में वे नहीं पहुंचे. सोनिया गांधी के आवास पर हुई मीटिंग भी मिस की. वजह यात्रा बताई गई. लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंदरूनी नाराजगी की बात भी सामने आई. कोच्चि में राहुल गांधी के कार्यक्रम में थरूर का नाम न लिया जाना भी असहजता का कारण बना. इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ वाले बयान ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया था.
खड़गे की मौजूदगी क्यों अहम?
इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी इसे और गंभीर बनाती है. खड़गे सिर्फ पार्टी अध्यक्ष नहीं हैं बल्कि संगठनात्मक संतुलन के केंद्र भी हैं. राहुल गांधी के साथ उनकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि कांग्रेस नेतृत्व मतभेदों को नजरअंदाज नहीं करना चाहता. बल्कि सीधे संवाद से सुलझाने की कोशिश कर रहा है.
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
यह मीटिंग ऐसे वक्त पर हुई है, जब कांग्रेस को संसद में एकजुट विपक्ष की भूमिका निभानी है. बजट सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति बनानी है. साथ ही केरल जैसे राज्यों में संगठन को मजबूत करना है. थरूर तिरुवनंतपुरम से सांसद हैं. उनकी लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय छवि पार्टी के लिए अहम है. ऐसे में यह मुलाकात कलह थामने की कोशिश भी लगती है.
बैठक से जुड़े अहम प्वाइंट
- बैठक राहुल गांधी के संसद कार्यालय में हुई.
- शशि थरूर, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे मौजूद थे.
- बातचीत आधे घंटे से अधिक चली.
- कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया.
- मीटिंग का समय और चुप्पी, दोनों ने अटकलें बढ़ाईं.
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर 5 सवाल-जवाब
शशि थरूर ने राहुल गांधी से क्या बात की?
बैठक बंद कमरे में हुई और आधे घंटे से ज्यादा चली. आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई. लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार आंतरिक मतभेद, भूमिका और एकता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
थरूर को लेकर नाराजगी क्यों मानी जा रही है?
कोच्चि कार्यक्रम में अनदेखी, केरल रणनीतिक बैठकों से दूरी और मोदी की तारीफ वाले बयान ने असहजता बढ़ाई.
क्या थरूर पार्टी छोड़ सकते हैं?
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है. थरूर खुद कह चुके हैं कि मुद्दे आंतरिक हैं और मीडिया में नहीं उठाए जाने चाहिए.
इस बैठक का राजनीतिक महत्व क्या है?
बजट सत्र और केरल चुनाव से पहले पार्टी एकजुटता का संदेश देना चाहती है. यह बैठक उसी दिशा में कदम मानी जा रही है.
क्या इससे कांग्रेस की कलह थम जाएगी?
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी. लेकिन संवाद की पहल को सकारात्मक संकेत जरूर माना जा रहा है.
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