
कोहली का आत्मविश्वास ही उसकी ताकत, ईशांत बोले—यह जीत टीम और विराट दोनों के लिए खास
इस बार हरियाणा पहुंचा है। गुरुग्राम में 17 दिसंबर यानी बुधवार को होने वाले इस खास आयोजन में मनोरंजन, खेल और राजनीति सहित अलग-अलग क्षेत्रों की तमाम दिग्गज हस्तियां हिस्सा लेंगी। इसी कड़ी में भारत के दिग्गज तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा भी इस खास कार्यक्रम में शामिल होंगे। महज 18 साल की उम्र में डेब्यू कर रातों-रात दौलत-शोहरत और प्रसिद्धी पाने वाले ईशांत शर्मा की कहानी किसी भी साधारण परिवार के युवक के लिए प्रेरणा हो सकती है।सवाल – रिकी पोंटिंग आए और जाए। क्या खास था कि वो इतने परेशान हो गए?,
सवाल – 100 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले। जब करियर को पलट कर देखते हैं तो क्या मोमेंट है जो सबसे ज्यादा याद आता है?
ईशांत: सर मैं हमेशा यकीन करता हूं कि ग्रजेज या पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। आगे क्या है उसपर ध्यान देना चाहिए। जैसे जैसे आप कोई भी स्पोर्ट हो लाइफ हो, अगर आप गलती करते हैं और तो उससे सीखते हैं। क्रिकेट में एक चीज है कि आप जो एक बार गलती हैं, उसे कितने समय बाद रिपीट करते हैं, वो कंसिस्टेंसी होती है। तो वही मैं कोशिश करता था कि गलती मैं जितने टाइम तक टाल सकूं। जब हम 2018 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीती वो एक ऐसी याद है कि वो हमेशा मेरे दिल के करीब रहेगी। मैं जो 100 टेस्ट खेला, उससे भी ज्यादा। ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना बहुत मुश्किल काम है। आप सिर्फ उनके 15 खिलाड़ियों के खिलाफ नहीं खेलते, उनके पूरे देश के खिलाफ खेलते हो। जब आप खाना खाने जाते हो तो भी स्लेजिंग मिलती है, जब कॉफी पीने जाते हो तो भी आपको स्लेजिंग मिलती। वहां की भीड़ आपको फील कराती है कि आप सिर्फ ऑस्ट्रेलिया टीम के खिलाफ नहीं खेल रहे, बल्कि पूरे ऑस्ट्रेलिया देश के खिलाफ खेल रहे हो।ईशांत: सर ऐसा कुछ था नहीं, जितना आपने उसको बना दिया। जो हमारा काम था, वो हमने किया। मैं यंग था रॉ था..जब आता था और सिर्फ बॉलिंग करता था। कुछ ज्यादा पता नहीं था। कभी भी ये ध्यान नहीं दिया कि कौन बैटर है। हमने अपना काम शिद्दत से किया। आप एक चीज भूल गए कि मेलबर्न में ड्रेसिंग रूम की वॉक बहुत लंबी होती है।

