
आंखों की नहीं…. दिल की नजर से दिखा सच्चा प्यार, जानिए दृष्टि और ऋषभ की प्रेम कहानी
गाजियाबाद की दृष्टि गुप्ता और बुलंदशहर के ऋषभ अग्रवाल की कहानी सच्चे प्यार की एक खूबसूरत मिसाल है. 80 प्रतिशत नेत्रहीन होने के बावजूद दृष्टि का आत्मविश्वास और हौसला हर चुनौती पर भारी रहा. साल 2016 में पहली मुलाकात के बाद दोनों की दोस्ती गहरी होती चली गई, लेकिन दृष्टि अपनी आंखों की समस्या को ऋषभ की जिंदगी से जोड़ना नहीं चाहती थीं. इसके बावजूद ऋषभ ने कभी हार नहीं मानी और हर हाल में साथ निभाने का भरोसा दिलाया. आखिरकार 15 जुलाई 2021 को यह रिश्ता शादी में बदल गया, जो आज भी उतना ही मजबूत और प्रेरणादायक है.अक्सर दोस्ती से शुरू हुए कई रिश्ते बीच में ही टूट जाते हैं, लेकिन दृष्टि गुप्ता और ऋषभ अग्रवाल की दोस्ती ने प्यार और भरोसे की एक नई मिसाल कायम की. साल 2016 में पहली मुलाकात के बाद दोनों अच्छे दोस्त बने और समय के साथ यह रिश्ता और गहरा होता चला गया. जब ऋषभ ने अपने दिल की बात कही, तो दृष्टि ने अपनी मजबूरी बताते हुए इनकार कर दिया. इसके बावजूद ऋषभ का भरोसा और साथ कभी कम नहीं हुआ. आज शादी के चार साल बाद भी दोनों एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त हैं और हर सुख-दुख में साथ खड़े नजर आते हैं.दृष्टि गुप्ता की कहानी सिर्फ प्रेम की नहीं, बल्कि हौसले और आत्मबल की भी मिसाल है. 80 प्रतिशत तक नेत्रहीन होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया. समाज और रिश्तों से जुड़े कई सवालों के बीच उन्होंने खुद को मजबूत बनाए रखा और आगे बढ़ती रहीं. इस पूरे सफर में ऋषभ हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे. आज दृष्टि एक सरकारी बैंक में मैनेजर हैं, जो यह साबित करता है कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी शारीरिक कमी बाधा नहीं बन सकती. उनकी यह कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.दृष्टि और ऋषभ का रिश्ता आसान नहीं था. शादी का फैसला लेने के बाद दोनों परिवारों में कई सवाल उठे, खासकर दृष्टि की आंखों की समस्या को लेकर. समाज की सोच और भविष्य की चिंताओं ने कई बार रास्ता रोका, लेकिन दोनों ने धैर्य और समझदारी से हर आपत्ति का सामना किया. समय के साथ परिवार भी उनके जज़्बे को समझने लगा. आखिरकार, 15 जुलाई 2021 को दोनों की शादी हुई. यह कहानी साबित करती है कि जब इरादे साफ हों, तो समाज की दीवारें भी गिर सकती हैं.ऋषभ अग्रवाल सिर्फ दृष्टि के पति नहीं, बल्कि उनके हर दिन का भरोसेमंद सहारा हैं. खाना बनाना हो, दवाएं देना हो या ऑफिस की तैयारी ऋषभ हर छोटे-बड़े काम में उनके साथ रहते हैं. दृष्टि की जरूरतों को समझना और बिना कहे मदद करना ही उनके रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती है. आज भी दोनों दोस्त की तरह एक-दूसरे के साथ वक्त बिताते हैं. यह रिश्ता साबित करता है कि शादी सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि हर जिम्मेदारी को मिलकर निभाने का वादा है.

